🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
परिवर्तित सोच
ऐसे ही एक बार मेरे आगे वाली कार कछुए की तरह चल रही थी और मेरे बार-बार हॉर्न देने पर भी रास्ता नहीं दे रही थी। मैं परेशान हो कर चिल्लाने ही वाला था कि मैंने कार के पीछे लगा एक छोटा सा स्टिकर देखा जिस पर लिखा था _"शारीरिक विकलांग; कृपया धैर्य रखें"!_ और यह पढ़ते ही जैसे सब-कुछ बदल गया!!
मैं तुरंत ही शांत हो गया और कार को धीमा कर लिया। यहाँ तक की मैं उस कार और उसके ड्राईवर का विशेष ध्यान रखते हुए चलने लगा कि कहीं उसे कोई कष्ट न हो। मैं कार्यालय कुछ मिनट देर से अवश्य पहुँचा मगर मन में एक संतोष था।
कहने को तो यह एक कहानी है सत्य या असत्य। पर एक मूल बात यह एक अनुभूति/आभास/सोच से व्यवहार में परिवर्तन आता है, क्षण भर में ही जीवन जीने का,किसी के प्रति सोच का दृष्टिकोण बदल जाता है।
हम सभी इसलिए उलझनों में हैं, क्योंकि हमने अपनी धारणाओं रूपी उलझनों का संसार अपने इर्द- गिर्द स्वयं रच लिया है। मैं दिनेश यह नहीं कहता कि किसी को परेशानी या तकलीफ नहीं है... पर क्या निराशा या नकारात्मक विचारों से हम उन परिस्थितियों को बदल सकते हैं?
आवश्यकता है एक आशा, एक उत्साह से भरी सकारात्मक सोच की, फिर परिवर्तन तत्क्षण आपके भीतर आपको अनुभव होगा। उस लहर में हताशा की मरुभूमि भी नंदन वन की भांति सुरभित हो उठेगी। बस यही सकरात्मक सोच/आभास/दृष्टिकोण देने का प्रयास मैं दिनेश बरेजा इन दैनिक कहानियों से करता आ रहा हूँ। आप सभी का इन कहानियों/सोच/विचारों को आगे साँझा करने लिए अग्रिम धन्यवाद-दिनेश बरेजा
ज्ञानरहित भक्ति-अंधविश्वास
भक्तिरहित ज्ञान-नास्तिकता
प्रेषक-दिनेश बरेजा
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