अनुवादक

बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

" उसने कहा था " कहानी ~ नमः वार्ता


🔆💥 जय श्री राम 🔆💥

 उसने कहा था 

पत्नी : अरे ये क्या कर रहे हो ?
 
पति: दिख नहीं रहा बुद्धू पौधा लगा रहा हूँ !

पत्नी : वो तो दिख ही रहा है पर अचानक क्या सूझी ?

पति : आज तुम्हारा जन्मदिन है ना.. तो मैंने तय किया है कि तुम्हारे हर जन्मदिन पर एक पौधा लगाउँगा और देखना एक दिन ये सारे पौधे विशाल पेड़ बनेंगे और बग़ीचे का हर कोना तुम्हारे अहसास से भरा होगा मेरे ह्रदय की भांति,और जब हमारे बच्चे और बच्चों के बच्चे होंगे ना वो सब भी तुम्हारे नाम की ऑक्सिजन लेंगे"।

पत्नी  ने  ठहाके लगाते हुए बोली "तुम सच में पागल हो गए हो और बता देती हूँ , आपका ये पौधे लगाने वाला विचार अधिक से अधिक तीन वर्ष तक चलेगा फिर भूल जाओगे तुम जैसे हर चीज़ भूलते हो"।

पति के चेहरे का भाव बदल गया।"ऐसे मत कहो ना यार,और जब मैं कोई चीज़ मन से करता हूँ ना तो उसे कभी नही भूलता "।
पत्नी बोली "तो फिर वचन दो तुम जीवन भर मेरे हर जन्मदिन पर यहाँ पौधे लगाओगे चाहे हम साथ हो या ना हो..

पति बोला 'मैं वचन देता हूं.. किंतु आगे से कभी तुम ये साथ ना रहने की बात नहीं करोगी"।
पत्नी ने प्यार से उसे गले लगा लिया।ओह मेरे डब्बू....

पूरे बीस साल हो गए... 

न जाने वो समय की कौनसी अभागिन घड़ी थी जिसने दोनो को अलग कर दिया था आज पत्नी विवाह विच्छेद के उपरांत फिर उसी शहर में थी..

वहाँ का हर कोना,हर गली,हर जगह, उसके पति का स्मरण दिला रही थी..

वह पति की एक झलक के लिए उत्सुक हो रही थी किंतु वो कहीं नहीं दिखा..

"जाते हुए अंतिम बार उसी ने तो उससे वादा लिया था कि कभी पलट के नहीं आओगे मेरी जीवन में"।

तेज़ बारिश हो रही थी भीगते हुए चलते-चलते उसके क़दम स्वम ही उस बग़ीचे की ओर बढ़ने लगे, वहाँ पहुँचते ही उसका गला भर आया।यही वह जगह थी जहाँ उसने अपने पति के साथ अपने जीवन के सबसे बेहतरीन और सुकून भरे पल जिए थे.. 

अंदर जा कर देखा तो बग़ीचा सुंदर और हरा-भरा दिख रहा था और तभी अचानक उसकी दृष्टि उसके पति पर पड़ी जो वहाँ बैठा पौधा लगा रहा था।उसे देखते ही वो स्वयं को रोक नहीं पायी और दौड़ के उसे गले लगा लिया और फूट फूट के रोने लगी..
पति कुछ नही बोला बस मौन खड़ा रहा..

तभी एक लड़की आयी और बोली "सॉरी आंटी मेरे पापा कई साल पहले अपनी स्मरण शक्ति खो चुके हैं.. ही इज़ अल्ज़ाइमर पेशंट" कई सालों से वो जुलाई की हर सात दिनांक को बस एक बार यहाँ आते हैं और एक पौधा लगा जाते हैं" जब भी हम इसका कारण पूछते है तो इनका एक ही जवाब होता है-
 "उसने कहा था" 

 आइये हम भी आने वाले वंश के लिए ऑक्सीजन का प्रबंध करे-पौधा लगाए।
प्रेषक- दिनेश बरेजा 

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