लखनऊ नगर का प्राचीन नाम लखनपुर था और इसकी स्थापना भगवान श्री रामचंद्र जी के अनुज लक्ष्मण जी ने की थी। इसलिए इस शहर को लक्ष्मणावती या लक्ष्मणपुर के नाम से जाना गया।लखनऊ भगवान श्रीराम की राजधानी अयोध्या से मात्र 128 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह त्रेता युग के कौशल राज्य का हिस्सा था जो की वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य का कुछ भूभाग है |
जैसा कि रामायण में उल्लेख है कि जब लंका पर विजय के पश्चात भगवान राम अयोध्या लौटे और तत्पश्चात कौशल राज्य के सिंहासन पर बैठे जिसकी राजधानी अयोध्या थी | हम सभी जानते हैं की किस प्रकार जनता की आशंकाओं की वजह से भगवान राम ने सीता मैया को वन गमन का आदेश दे दिया था और प्रभु राम के आदेश पर लक्ष्मण जी सीता मैया को लेकर वन में छोड़ने के लिए गए थे। और उस मार्ग में गोमती नदी के तट पर एक मनोरम ऊंचा टीले जैसा स्थान देखकर लक्ष्मण जी ने सीता मैया से पूछकर यहां विश्राम किया और उसके बाद सीता मैया को ले कर वन में छोड़ने चले गये | जब लक्ष्मण जी ने सीता जी को वन में वाल्मीकि महर्षि के आश्रम में छोड़ दिया तो वापिस अयोध्या को निकल पड़े |
लौटते समय जब मार्ग में वही मनोरम स्थान पुनः दिखा तो वहां रुक गए। उस समय लक्ष्मण जी सीता मैया को छोड़कर अत्यंत दुखी थे और वहां कुछ देर के लिए रुक गए और गोमती नदी में स्नान किया और वापिस लौट आए। जब लक्ष्मण जी वहां से अयोध्या चले गये । जिस टीले पर लक्ष्मण जी ने विश्राम किया था उस टीले का नाम लक्ष्मण टीला पड़ गया | अयोध्या आकर भी उन्हें यह स्थान याद रहा और अपने सेवकों को वहां एक नगर बसाने के लिए कहा और स्थान का नाम लक्ष्मणपुर रखा गया। यहां पर कालांतर में काफी बड़ी बस्ती बस गई और नगरीय विकास हो गया जो आज लखनऊ है। कालांतर में वहां लक्ष्मण जी एक मंदिर बना जो मुगल काल से भी सैकड़ों वर्ष पुराना था।
इस टीले पर एक शेष (शेषनारायण) की गुफा भी थी जहां काफी बड़ा मेला लगता था और गोमती नदी लक्ष्मण टीले को छूते हुए निकलती थी | क्रूर बादशाह अल्लाउद्दीन खिलजी के वक्त तक यहाँ लक्ष्मण मंदिर और गुफा थी जिसको उस समय ध्वस्त किया गया | बार-बार लक्ष्मण टीले को भी ध्वस्त किये जाने का प्रयास किया जाता रहा
औरंगज़ेब ने काशी, मथुरा आदि के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों के समान ही लक्ष्मण टीले स्थित लक्ष्मण मंदिर को तुड़वा डाला था और लक्ष्मण टीला को काफी तोड़कर उसके ऊपर एक मस्जिद बना दी जिसका नाम गुलाबी मस्जिद या लक्ष्मण टीले वाली मस्जिद रखा गया |
वर्तमान लखनऊ शहर का आविर्भाव इसके पुराने भाग से ही हुआ जहाँ एक ऊंचा ढूह या टीला है जिसे त्रेता युग से ही आज तक 'लक्ष्मणटीला' कहा जाता है।
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