🚩जय सत्य सनातन🚩
🔸भक्तों के प्रति भगवान का प्रेम🔸
🚩एक बुजुर्ग दरिया के किनारे पर जा रहे थे। एक जगह देखा कि दरिया की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के किनारे पर आ गया।
🚩उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने दरिया के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने तैरना शुरू कर दिया। वह बुजुर्ग बड़े हैरान हुए।
🚩उन्होंने उस कछुए का पीछा करने की ठान ली। इसलिए दरिया में तैर कर उस कछुए का पीछा किया।
🚩वह कछुआ दरिया के दूसरे किनारे पर जाकर रूक गया। और बिच्छू उसकी पीठ से छलांग लगाकर दूसरे किनारे पर चढ़ गया और आगे चलना शुरू कर दिया।
🚩वह बुजुर्ग भी उसके पीछे चलते रहे। आगे जाकर देखा कि, जिस तरफ बिच्छू जा रहा था उसके रास्ते में एक भगवान् का भक्त ध्यान साधना में आँखे बन्द कर भगवान् की भक्ति कर रहा था।
🚩उस बुजुर्ग ने सोचा कि अगर यह बिच्छू उस भक्त को काटना चाहेगा तो मैं करीब पहुँचने से पहले ही उसे अपनी लाठी से मार डालूँगा।
🚩लेकिन वह कुछ कदम आगे बढे ही थे कि, उन्होंने देखा दूसरी तरफ से एक काला जहरीला साँप तेजीसे उस भक्त को डसने के लिए आगे बढ़ रहा था। इतने में बिच्छू भी वहाँ पहुँच गया।
🚩उस बिच्छूने उसी समय सांप डंक के ऊपर डंक मार दिया, जिसके कारण बिच्छू का जहर सांपके शरीर में दाखिल हो गया और वह सांप वहीं अचेत हो कर गिर पड़ा था। इसके बाद वह बिच्छू अपने रास्ते पर वापस चला गया।
🚩थोड़ी देर बाद जब वह भक्त उठा, तब उस बुजुर्ग ने उसे बताया
🙏भगवानने उसकी रक्षा के लिए कैसे उस कछुवे को दरिया के किनारे लाया, फिर कैसे उस बिच्छुको कछुए की पीठ पर बैठा कर साँप से तेरी रक्षा के लिए भेजा।
🚩वह भक्त उस अचेत पड़े सांप को देखकर हैरान रह गया। उसकी आँखों से आँसू निकल आए, और वह आँखें बन्द कर प्रभु को याद कर उनका धन्यवाद करने लगा ।
🙏तभी ""प्रभु"" ने अपने उस भक्त से कहा
जब वो बुजुर्ग जो तुम्हे जानता तक नही, वो तुम्हारी जान बचाने के लिए लाठी उठा सकता है, फिर तू तो मेरी भक्ति में लगा हुआ था, तो तुझे बचाने के लिये मेरी लाठी तो हमेशा से ही तैयार रहती है ।
🚩ईश्वर की सच्ची भक्ति करने वाले कि रक्षा स्वयम ईश्वर करते हैं...बस भक्ति भाव निश्छल होना चाहिए
प्रेषक व आभार - प्रसाशक समिति
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